हरदोई में युवाओं की टोली फ़िलहाल हफ्ते में एक दिन गरीबों को मुफ्त में खाने का हक़ देने का प्रयास कर रही है

0
197

सरकारें भले ही खाद्य सुरक्षा क़ानून के तहत गरीबों को खाने का हक़ देने की बात करे और नौकर शाह उसपर अमल उस पर अमल न करते हों। मगर हरदोई में युवाओं की टोली फ़िलहाल हफ्ते में एक दिन गरीबों को मुफ्त में खाने का हक़ देने का प्रयास कर रही है।

हमारे शास्त्रों में भी वर्णित है सेवा परमो धर्मः और अगर यह भावना सभी मानव के दिलों में व्याप्त हो जाय तो मानव जीवन को सार्थकता मिल जाएगी और जरुरतमन्द को जीवन। सेवा के इसी धर्म को हरदोई के कुछ युवको ने आपस में मिलकर सार्थक करने का प्रयास किया है बुन्देलखण्ड में भूखे लोगों तक भोजन पहुंचाने की रोटी बैंक की मुहीम की तर्ज़ पर बीते दिनों हरदोई में शुरू हुई रोटी बैंक के बाद ज़िले के संडीला में भी कुछ युवको ने सप्ताह के प्रत्येक रविवार को “संडीला रोटी बैंक का सपना, भूखा न सोये कोई अपना”के नारे के साथ मुहिम की शुरुआत की है। करीब 15 युवाओं की टोली हर शनिवार गरीबों को घर की बनी रोटिया खिलाने की शुरुआत की है। शहरी गरीबों के लिए बनी काशीराम कालोनी में शुरू रोटी बैंक का शुभारंभ काशीराम कालोनी की सबसे बुजुर्ग महिला और वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत पाठक ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।देश के पिछड़े जिलो में शुमार किये जाने वाले हरदोई ज़िले की तहसील संडीला के एक छोटे से गांव कुरना में रहने वाले विशाल सिंह ने अपने करीब एक दर्जन युवा साथियो के साथ मिलकर रोटी बैंक की इस मुहीम की शुरुआत की है। उन्होंने इसे देश के दुसरे जिले में लोगो द्वारा चलाये जा रहे रोटी बैंक से प्रेरणा लेकर शुरू की। इस संगठन ने हालांकि अभी इस मुहिम की शुरुआत सप्ताह में रविवार को एक दिन शाम के साथ शुरू की है और रात नौ बजे तक रोटी वितरण का काम भिखारियों और रेलवे स्टेशन ,बस्टेशन ,अस्पताल पर दिखने वाले गरीबों तक रोटी पहुंचाने लक्ष्य रखा है।
बहुत ही सीमित संसाधनो के जरिये शुरू हुई रोटी बैंक यह मुहिम ने भले ही अभी सप्ताह में एक ही दिन भूखों तक रोटी बाटने का काम करेगी। लेकिन आगे इसे प्रति दिन करने की योजना है। यह संगठन शहर से हर रविवार को प्रत्येक घर से 2 से 4 रोटी इकट्ठा करेंगे जबकि सब्जी से लेकर गुड ,प्याज, मिर्च और आचार की व्यवस्था यह लोग अपने संसाधनो से जुटाकर भूखे लोगो तक निवाला पहुँचाएंग बैंक में केवल रोटी आ जाने के बाद इसी संगठन से जुड़े लोग पहले उन आई रोटियों के पैकेट को खोलते हैं और एक जगह एकत्र करते है उसके बाद उनको सब्जी,अचार ,प्याज और गुड के साथ दुसरे लिफाफो में पैक करने में इसी संगठन के लोग तनमन से जुटते भी है। इसके बाद रोटी बैंक के लोग इन पैकेटो को जरुरतमंदो को पहुचाते भी है। रोटी बैंक के सदस्यों के मुताबिक उनको इस सेवा भाव से संतुष्टि मिलती है।

LEAVE A REPLY