सिद्वार्थनगर में हुई हत्या कातिल का नहीं चला पता

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सिद्वार्थनगर जिले मे मनीष शुक्ला हत्याकांड का खुलासा करने मे अभी तक पुलिस नाकाम ही दिख रही है। पन्द्रह दिन पहले मनीष का अपहरण फिर उसकी हत्या की गुत्थी सुलझाने मे नकाम पुलिस पर परिजनो ने लापरवाही का आरोप लगाना शुरू कर दिया है। पिछले पन्द्रह दिनो से मातम मे डुबा सिद्वार्थनगर जिले गौरा गांव का यह परिवार पुलिस पर आस लगाये बैठा है। उन्हे यह उम्मीद है कि पुलिस उनके लाडले मनीष के हत्यारो तक जरूर पहुचेगी। लेकिन पुलिस की कार्यशैली और सुस्त रफ्तारी से उनकी उम्मीदें दम तोडती दिख रही है। परिवार का आरोप है कि जब 21 जनवरी को मनीष गायब हुआ उस वक्त से लेकर 29 जनवरी को शव मिलने तक पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से नही लिया। अगर शोहरतगढ थाने की पुलिस मनीष के गायब होते ही सक्रिय हुयी होती और संदिग्धो पर सख्ती कर पता लगाने की कोशिश की होती तो उनका बेटा जिंदा होता। उन्होने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि शव मिलने के बाद भी पुलिस की पकड से हत्यारे कोसो दूर है। हत्या की गुत्थी सुलझाने मे पुलिस के हाथ अब तक खाली है। इसी से पुलिस की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रोते बिलखते परिजन पुलिस के आलाधिकरियो से न्याय की मांग कर रहे है। पन्द्रह दिन बीत जाने के बाद मनीष हत्याकांड का खुलासा न होना पुलिस के लिए सिर दर्द बन गया है। पुलिस के अधिकारी अपनी इस विफलता को लाख छिपाने का प्रयास करे लेकिन जिले मे उनकी कार्यशैली को लेकर कानाफूसी भी शुरू हो गयी है। पुलिस की निष्क्रियता से नाराज कई जनप्रतिनिध्यििो ने पिडित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की और स्थानीय पुलिस पर आरोपियो को बचाने का आरोप लगाते हुये जल्द से जल्द खुलासे की मांग की। इस हत्याकांड मे जिले के पुलिस कप्तान पुलिस का बचाव करते हुए नजर आ रहे है। उन्होने परिजनो के आरोपो को खारीज करते हुए कहा िकइस मामले मे पुलिस तत्परता से कार्य कर रही है। अपहरण फिर हत्या और अभी तक हत्या का खुलासा न होना सिद्वार्थनगर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है। 15 दिन के बाद भी अगर पुलिस के हाथ अब तक खाली है तो आम लोग अपने को कैसे सुरक्षित महसूस करेगे यह बडा सवाल है।
रिपोर्ट-मोहम्मद अमीन फारुकी

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