Home लखनऊ समाज कल्याण विभाग का आंदोलन पांचवें दिन भी जारी

समाज कल्याण विभाग का आंदोलन पांचवें दिन भी जारी

खाद्य रसद विभाग ने भी किया समर्थन, संविदा कर्मियों की दमन नीतियों का विरोध जारी, समाज कल्याण विभाग नहीं ले रहा है संज्ञान

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे. एन. तिवारी ने आज लखनऊ में समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग मे चल रहे आंदोलन की समीक्षा करते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि समाज कल्याण विभाग के संविदा कर्मियों ने विभागीय उत्पीड़न के खिलाफ आज पांचवे दिन भी आंदोलन जारी रखा। सभी आश्रम पद्धति विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।
विभाग के संविदा शिक्षक नवीनीकरण में बिलंब एवं जिला समाज कल्याण अधिकारियों एवं स्कूलों के प्रधानाचार्य के उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। संविदा शिक्षकों का नवीनीकरण मई में हो जाना चाहिए था, लेकिन अगस्त बीतने को आ रहा है और अभी तक नवीनीकरण नहीं हो पाया है।
संयुक्त परिषद के अध्यक्ष ने कहा है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की शिथिलता के चलते नवीनीकरण में विलंब हो रहा है। नवीनीकरण के नाम पर विभाग में बड़े पैमाने पर खेल किया जा रहा है।
50% परीक्षा परिणाम का आधार बनाकर एवं नियंत्रक अधिकारियों से शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट बनवाकर नवीकरण रोकने का कुचक्र चलाया जा रहा है।
कोई जिम्मेदार अधिकारी समस्याओं का संज्ञान लेकर बात भी नहीं कर रहा है। ऐसी स्थिति में विभागीय संविदा कर्मियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 27 अगस्त को निदेशालय के घेराव का कार्यक्रम है।
यदि 27 अगस्त के पूर्व नवीनीकरण सहित अन्य सभी मांगों पर कार्यवाही नहीं हुई तो निदेशालय के घेराव के साथ-साथ काम बंद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विभाग द्वारा 2020 में चार संविदा कर्मियों को B.Ed डिग्री ना होने के कारण संविदा से हटाया गया था, उन्हें अभी तक संविदा पर वापस नहीं लिया गया है।
हटाए गए कर्मी निदेशालय पर अनशन करने की धमकी दे रहे हैं।संयुक्त परिषद के अध्यक्ष ने विभागीय मंत्री से दूरभाष के माध्यम से प्रकरण का संज्ञान लेकर हल निकालने का अनुरोध भी किया है। आज समाज कल्याण के आंदोलन के सहयोग में खाद्य रसद विभाग के कर्मचारियों ने भी काली पट्टी बांधकर काम किया। समाज कल्याण विभाग के आंदोलन को धीरे-धीरे राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अन्य घटकों का सहयोग मिलना शुरू हो गया है। जे एन तिवारी ने इस आंदोलन के लिए पूरी तरह से निदेशक समाज कल्याण एवं उप निदेशक जनजाति विकास को जिम्मेदार ठहराया है।

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